फास्ट फूड स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है और कितना घातक है
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फास्ट को स्वास्थ्य के लिए कितना घातक और घातक हो सकता है हमारे शरीर में कितने नुकसानदायक हानिकारक पदार्थ है फास्ट फूड खाने से अंदर जाते हैं इस बारे में आज आपको मैं विस्तार से जानकारी देने जा रहा हूं मैं किसी भी प्रकार का कोई बेड या फिर किसी भी प्रकार का कोई डॉक्टर नहीं हो केवल एक आपको जानकारी दे रहा हूं
फास्ट फूड में तले हुए तथा बिना रेशे वाले खाद्य पदार्थ होने के कारण या पाचन तंत्र को खराब कर देते हैं और डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों की सुरक्षा रखने के लिए प्रयोग में ले गए केमिकल्स भी पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव डालते हैं रेशेदार और प्राकृतिक भोजन की अपेक्षा के कारण पेट के रोग पनपते हैं और धीरे-धीरे स्वास्थ्य को चौपट कर देते हैं माता-पिता अपने मित्रों की देखा देखा देखी बच्चे भी फास्ट फूड खाना बड़प्पन की निशानी मानते हैं अतः समूचा परिवार ही विभिन्न प्रकार के रोगों की चपेट में आ जाता है और शरीर की अपेक्षा पर परिमाण व्यक्ति को डॉक्टर के यहां चक्कर काट कर चुकाना पड़ता है रोगों के कारण शरीर नष्ट हो जाता है सो अलग अतः सीधी सी बातें यह घर का पक्का ताजा और स्वास्थ्य संतुलित एवं पौष्टिक खाना खाने से रोग सदैव दूर रहेंगे यह भी तो एक तरह से भोजन द्वारा चिकित्सा ही है
उत्तेजक और मादक पदार्थ का सेवन रोगों का आमंत्रण देना है
उत्तेजक और मादक पदार्थों का सेवन रोगों का आमंत्रण है जैसे कि चाय और काफी जैसे उत्तेजक पदार्थ आज हमारे दैनिक खान-पान का हिस्सा बन चुके हैं अत्यधिक मात्रा में चाय और काफी का प्रयोग व्यक्ति खासकर बच्चों के शरीर और मानसिक विकार पर बहुत ही घातक असर डाल रहा है बच्चों में उत्तेजना चिंता मानसिक थकाओ याद दास की कमी आलस और खुशी इन्हीं उत्तेजक गम और मादक पदार्थों की देन है इधर पिछले कुछ वर्षों से कुछ गुटखा कंपनियां विभिन्न प्रकार के आकर्षण पकटन में तंबाकू मिश्रित और सदा गुड के बीच रही हैं अखबारों में बार-बार इन गुटखों के दुष्प्रभाव से सतर्क करने वाले लेख छपते रहते हैं मुंह का कैंसर तथा आंतों के अनेक रोग इन्हीं विषैला पदार्थ की देन है बीड़ी सिगरेट पीने और शराब खोरी का प्रचलन भी पिछले दिनों समाज में तेजी से बढ़ रहा है आकर्षण विज्ञान इन पदार्थों को प्रतिष्ठा का प्रतीक बन रहे हैं जिससे युवा शीघ्र ही इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं नशे का यह शिकंजा जाने कितने लोगों को बीमत मर चुका है और कितने ही लोग को अपनी गिरफ्त में कसता जा रहा है जैसे मुंह गले छाती फेफड़े आदि के कैंसर पथरी गैस अफरा बदहजमी अन्य पेट के गंभीर रोग नेत्र रोग और मस्तिक रोग की तरह जाने कितने और अन्य इस लत के चक्कर में हमने खुद अपने ऊपर लड़ लिए हैं घरेलू दवाइयां इन लोगों और बुरी आदतों से बचाव में बड़ी महत्वपूर्ण और स्थाई भूमिका निभा सकती हैं
बच्चों को संयम की शिक्षा रोग से उनकी रक्षा
आधुनिक आधुनिकता की दौड़ और बढ़ते आरामदायक संसाधनों ने बच्चों की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है खासकर खान-पान में भी टॉफी चॉकलेट बिस्किट और अन्य बाजार रुपए तथा टेलीविजन और इलेक्ट्रॉनिक गेम्स आदि की बच्चों को अंसरिमिता करने में बड़ी भूमिका है ट्रॉफी और बाजारों पर पदार्थ बच्चों के दांत और पेट खराब कर देते हैं वही टेलिविजनों ने बच्चों की आंखों और मस्ती की क्रियो को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है यही कारण है कि बच्चों में दांतों के रोग तथा पाचन संबंधी रोग लगातार बढ़ते जा रहे हैं बहुत निकट से तथा अधिक समय तथा टेलिंग टेलीविजन देखने से बच्चों की आंखों की रोशनी कम होना आंखों में दर्द सिर में दर्द मानसिक तक और भूलने की आदत बढ़ती जा रही है टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों से बच्चों में संस्कृत प्रदूषण भी बढ़ रहा है और विश्व समय से पहले उन बातों को सीख रहे हैं जो मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छी नहीं कि कहीं जा सकती मसलन लूट हत्या मारपीट सेक्स या प्रेम की अभिव्यक्ति तथा अंग प्रदर्शन आदि बच्चों की मानसिकता पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं अतः बच्चों को समय से सोने जागने पढ़ाई व्यायाम आदि रुचि लेने के बारे में प्रेषित करना चाहिए तथा अनावश्यक बातों को सीखने से बचना चाहिए ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें हमेशा खुश रहें
हम स्वयं बन रहे हैं अपने दुश्मन
कार्तिक ने घरेलू चिकित्सा के लिए हमें अकूत और बहुमूल्य संपदा वरदान स्वरुप सोप है लेकिन हमने कथित विकास की दौड़ में आगे निकलने के लिए खुद की प्राप्ति के साथ अन्याय करना शुरू कर दिया है प्राकृतिक को उजाड़ कर शहरों में बदल दिया है बड़े-बड़े कारखाने लगाकर वातावरण वातावरण को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है और वाहनों के धुएं में प्राकृतिक को धोने से ढक दिया है हमारे आसपास का प्राकृतिक वातावरण समाप्त होता जा रहा है वनस्पति या दुर्लभ हो रही हैं और बनावटी जीवन के चक्कर में हम अचूक इलाज की घरेलू दवाइयां को भूलते जा रहे हैं
व्यवसायिकता की दौड़ और मीठा जहर
ज्यादा पैसा कमाने की चाह में हम व्यवसाय व्यवसाय की दौड़ में इतनी बुरी तरह बुरी तरह फस गए हैं कि लाभ कमाने के लिए अपने ही काम को मिलावट करके जहर परोसने में भी नहीं चूक रहे हैं बाजार में जिधर भी देखिए मिलावट का बोलबाला है जिससे वस्तुओं के असली गुण नष्ट हो जाते जा रहे हैं दूध भी शहर मसाले दाल चावल आटा जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक में मिलावट के कारण हम स्वयं को रोग रोगों को बुलवा दे रहे हैं
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