घरेलू चिकित्सा के अन्य नाम
घरेलू चिकित्सा के नुस्खे इतने लोकप्रिय हैं कि कहीं यह दादी अम्मा के नुस्खे कहानी दादी नानी के नुस्खे कहीं दादा जी के नुस्खे और कहीं विद्या चुटकुले के नाम से जाने जाते हैं यह उसकी इतनी सहज उपलब्ध हैं कि कोई अन्य इन्हें पैसे पैसे के नुस्खे कोई सस्ती दवाई और कोई कोई तो बे पैसे के नुस्खे या बी मूल नुस्खे का कर पुकारता है वस्तुतः घरेलू चिकित्सा की दवाइयां इतनी सस्ती है और सहज होती हैं कि लोग इन्हें घास फूस की दवा या फिर रख धूल की दवा तक कह देते हैं
लोकप्रिय चिकित्सा
घरेलू चिकित्सा पद्धति हमारे देश में बड़ी ही लोकप्रिय है खासकर दूर दराज के गांव देहात में जहां अस्पताल या डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं है घरेलू चिकित्सा ही प्राथमिक चिकित्सा का एकमात्र उपाय है शहरी और कई कशई जीवन में जहां डॉक्टर की सुविधा भी उपलब्ध है लोग सामान्य रोगों के लिए घरेलू दावों पर ही ज्यादा निर्भर रहते हैं किसी के दांत में दर्द है तो लॉन्ग पीसकर दांत या दाल में दबा लिया किसी को सर्दी जुकाम हो गया है तो तुलसी और काली मिर्च की चाय पी ली किसी को गले में खराश होने पर पानी को उबाल कर उसमें नमक डालकर गरारे कर लिया या अदरक का रस शहद में मिलाकर चाट लिया किसी को चोट लग गई है तो वह हल्दी चुने कल बांध लिया ऐसे कितने ही नुस्खे हैं जो गांव शहर में अधिकांश लोग उपयोग में लाते हैं यानी शायद ही ऐसा कोई घर हो जिसके सदस्यों को ऐसे 10-20 नुस्खे की जानकारी ना हो और जो वक्त पड़ने पर इनका इस्तेमाल ना करते हो
आकस्मिक चिकित्सा
हम चाहे शहरी या कशई क्षेत्र में रह रहे हो या दूर दराज के गांव देहात में हमारे जीवन में कभी ना कभी ऐसा क्षण आ ही जाते हैं जब हम आकस्मिक चिकित्सा की जरूरत होती है और डॉक्टर के पास पहुंचना तत्काल संभोग नहीं हो पता ऐसी स्थिति में घरेलू चिकित्सा बड़ी कारगर चिकित्सा सिद्ध होती है रात के 2:00 बजे है और छोटे मुन्ने के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हो गया है दर्द से चकते बुलाते बच्चों को देखकर सभी लोग परेशान हो गए अचानक दादी अम्मा आई थोड़ी सी हींग में पानी घोलकर बच्चों के नाभि के आसपास मालदी थोड़ी सी भुनी हींग और काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ बच्चे को पिला दिया और देखते ही देखते दर्द से छटपटा रहा बच्चा चैन से सो गया यह जरूरी नहीं ऐसी घटनाएं रात-बैराठी घाटे छोटे बच्चे खेल रहे हैं कि अचानक रानी बेटी की नाक से नकसीर फूट पड़ी तेजी से बहते खून से सारे कपड़े शुल्क हो गए इतने खून को देखकर बच्ची भी घबरा गई और माता-पिता भी परेशान खून रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था कि अचानक नानी ने कहा कि जरा सी पीली मिट्टी के ढीले को पानी से तार करके इसे सुना दो सिर नीचा करके इसे लिटा दो सर पर पानी की पट्टी रख दो और माथे पर पीली मिट्टी का लेप लगा दो पानी से सर जिला करते और पीली मिट्टी को सुगने ही नकसीर बंद हो गई ऐसी हालत में डॉक्टर की खोज की जाती है और जब तक बच्चों को लेकर डॉक्टर के पास जाया जाता है तब तक जाने कितना खून बह चुका होता घरेलू चिकित्सा की मामूली सी दावों ने बच्ची बच्ची को कारगर आकस्मिक चिकित्सा देकर इसी बड़ी परेशानी से बचा लिया
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