घरेलू उपचार के अस्थाई लाभ
ऐसा नहीं है कि घरेलू चिकित्सा केवल आकस्मिक चिकित्सा ही हो अधिकांश रोगों में यह एक अस्थाई चिकित्सा के रूप में विख्यात है गंभीर से गंभीर रोगों को जड़ से समाप्त करने के लिए घरेलू चिकित्सा देश भर में प्रसिद्ध है इसकी दवाइयां अपने धीमे किंतु अस्थाई प्रभाव के कारण रोगों पर कुछ देर से प्रभाव डालते हैं लेकिन रोगों की सही पहचान करके यदि दवा दी जाए तो घरेलू चिकित्सा से तुरंत और अस्थाई लाभ मिलता है दूसरी चिकित्सा पद्धतियों की तेज सरदार दावों के अस्थाई प्रभाव की अपेक्षा समझदार लोग घरेलू चिकित्सा पद्धति के अस्थाई प्रभाव देने वाले इलाज को अधिक पसंद करते हैं यही कारण है कि यह पद्धति आज भी एक कामयाब और लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति के रूप में विख्यात है और अब तो सारी दुनिया में इसका विस्तार हो चुका है
सस्ती और सरल चिकित्सा
घरेलू चिकित्सा में रोग का इलाज प्राकृतिक वनस्पतियों घर में उपलब्ध खान-पान की वस्तुओं तथा जल प्रकाश मिट्टी वायु ध्वनि और चुंबकीय आदि के द्वारा किया जाता है यह वस्तुएं हमें सहज ही उपलब्ध है और कीमत में भी सस्ती पड़ती है इसलिए घरेलू चिकित्सा सस्ती और सरल चिकित्सा है उड़द की जो डाल हम रोज खाते हैं यदि सीमित मात्रा में इसकी खीर बनाकर खाई जाए तो यह बेहद पौष्टिक है दोपहर को खाने के बाद अगर काला नमक और भुने हैं जीरे का डालकर एक गिलास मट्ठा ले लिया जाए तो खाना शीघ्र ही बच जाता है रात को यदि दूध के साथ शॉट और गुड ले लिया जाए तो सुबह पेट साफ हो जाता है नीम का तेल फोड़े फुंसी पर बहुत मुफीद है यदि जामुन की पट्टी दही मैं खोलकर पीने से पेचिश में आराम मिल जाता है तुलसी की पट्टी पानी मैं उबालकर पीने से सर्दी होने के साथ-साथ कई अन्य बीमारियां साहस से ठीक हो जाती है जो की सस्ती और शहद उपलब्ध होने के साथ-साथ रोगों को अस्थाई रूप से ठीक कर देती हैं
घरेलू चिकित्सा और हमारी प्राकृतिक
घरेलू चिकित्सा में रोगों का इलाज प्राकृतिक तरीके से किया जाता है यह चिकित्सा हमारी प्राप्ति के अनुकूल इसलिए पड़ती है क्योंकि व्यक्ति स्वयं प्रताप का ही अंश है उसी की श्रेष्ठ कृति है जो तत्व प्राकृतिक में विद्यमान है वह ही तत्व उसे प्राकृतिक में जन्म लेने वाले जीवनधारियों में अवश्य विद्यमान होते हैं अतः प्राकृतिक तत्व निसंदेह ही व्यक्ति के शरीर के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध होते हैं प्राकृतिक का कोई भी पदार्थ आना आवश्यक नहीं है प्रत्येक पदार्थ में गुण दोष अवश्य पाए जाते हैं इन गुण दोष वाले पदार्थों को आवश्यकता के अनुसार ग्रहण करना ही उपचार है प्राय विशेष वनस्पतियों के विशेष गुना से हम लाभ उठाते हैं किंतु वनस्पतियों के दोष या उनमें निहित हानिकारक पदार्थ भी आवश्यकता पड़ने पर बड़े लाभकारी सिद्ध होते हैं कांटे से कांटा निकालना या जहर से जहर मानने वाली लोग लोको पंक्तियां इसी प्रकार के प्रयोग का प्रमाण है आवश्यकता है तो सिर्फ इस बात की कि हम अपने शरीर की आवश्यकता को समझें और उसके अनुरूप तत्व वाले पौधों को या अन्य प्रकार के तत्वों से अपने शरीर की आवश्यकता को पूरा करें
घरेलू चिकित्सा और प्राकृतिक चिकित्सा
घरेलू चिकित्सा में प्राक ऋतिक पद्धत वनस्पतियों के अलावा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का भी उपयोग किया जाता है सूरज की धूप या प्रकाश चंद्रमा की चांदनी वायु मिट्टी जल विभिन्न प्रकार के रन तथा चुंबक आज प्राकृतिक साधन भी घरेलू चिकित्सा में सफल माध्यम है मुल्तानी मिट्टी से सिर धोना खुशी ऋषि और गर्मी का खत्म करने के लिए जहां लाभप्रद है वही गंगा किनारे की मिट्टी को शरीर में लगाने या माथे पर तिलक के रूप में लगाने से ठंडक और शांति मिलती है सफेद खड़िया मिट्टी चिकनी मिट्टी चुनाव मिट्टी गेरू मिट्टी आज मिशन का अनेक दवाइयां में उपयोग किया जाता है ठीक इसी प्रकार तांबे के बर्तन में रात को भरकर रख गए जल को सुबह पीने से यकृत के रोग दूर होते हैं गंगा का जल शरीर के अंदर और बाहर के अनेक रोगों रोगों का कारगर इलाज करता है आजकल तो रंग-बिरंगे जालौन के उपयोग से अनेक रोगों का इलाज किया जाता है सूर्य की रोशनी में शरीर से पसीना निकालकर अनेक हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर कर देता है सरसों का तेल लगाकर धूप में सेकने से शरीर को विटामिन डी मिलता है चंद्रमा की चांदनी शरीर को शीतलता प्रदान करने वाली और मां को अलादीन करने वाली सिद्ध होती है
साथ ही साथ में आपको बताता चलूं कि मैं कोई भी रजिस्टर्ड या किसी भी प्रकार का कोई भी बेड या डॉक्टर नहीं हूं मैं एक जानकारी आपके लिए प्रस्तुत किया हूं किसी भी उपचार करने से हेतु आप अच्छे बड़े डॉक्टर या विद्या की सलाह से ही घरेलू उपचार या फिर उनकी दवा से अपना उपचार करें इसमें हमारी बस जानकारी दी गई है हम किसी भी प्रकार का उपचार या आपको बढ़ावा नहीं देते हैं यह आपकी जिम्मेदारी बनती है
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