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घरेलू चिकित्सा के आयाम

 घरेलू चिकित्सा के आयाम

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति हमारे देश के प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है वैदिक काल में इस पद्धति का इतना अधिक विकास हुआ है की आयुर्वेदिक नाम से वेद की एक अलग शाखा बना दी गई सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों का इलाज इस पर पद्धति द्वारा किया जाता है और किया जाता रहेगा आज भी अध्ययन और अनुसंधान के बाद यह पाया गया है की आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली एक सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली है यही कारण है कि आज देश के सभी विश्वविद्यालयों तथा अनेक विदेशी विद्यालयों में इस चिकित्सा पद्धति को अन्य वर्तमान चिकित्सा पद्धतियों के समान ही मान्यता प्रदान की गई है

आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में चिकित्सा के लिए पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग किया जाता है पेड़ पौधे खनिज पदार्थ धातुओं रतन आदि के द्वारा रोगों की चिकित्सा की जाती है इसके साथ प्राकृतिक के अन्य संसाधनों जैसे मिट्टी जल वायु सूर्य का प्रकाश चुंबन आदि के द्वारा भी इस पद्धति में इलाज किया जाता है भारतीय ऋषि मुनियों ने प्राचीन काल में ही यह सत्य जान लिया था कि व्यक्ति प्रति का ही अंश है जो पिंड में है वही ब्रह्मांड में है जैसी युक्ति इस तथ्य को स्पष्ट करती है स्वाभाविक रूप से व्यक्ति के शरीर में वह भी वही तत्व है जो उसके क्षेत्र की प्राकृतिक में विद्यमान है जब कभी भी व्यक्ति के सपने क्रियाकलापों के कारण अथवा प्राकृतिक परिवर्तन के कारण इन तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है तो यही अवस्था रोग कहलाती है वर्तमान खोजो ने तो इन तत्वों की संख्या काफी निर्धारित की है किंतु वास्तव में यह पांच मूल तत्व पृथ्वी जल वायु अग्नि और आकाश के ही अप तत्व है

इन्हीं तत्वों की संतुलन को ठीक कर देना ही चिकित्सा है

यह कार्य दो प्रकार से किया जाता है पहले योग चिकित्सा बाहर से आवश्यक तत्व शरीर में पहुंच कर उनका संतुलन ठीक करते हैं और फिर उन कर्म को समाप्त करते हैं जिनसे यह असंतुलन पैदा हुआ है पहले विधि को दवा या औषधि देना कहते हैं और दूसरी को नियम संयम का पालन मानव की मूल प्रवृत्ति को जानकर चिकित्सा करने के कारण ही आयुर्वेद श्रेष्ठ चिकित्सा प्रणाली मानी जाती है

घरेलू चिकित्सा घरेलू चिकित्सा

आयुर्वेदिक चिकित्सा बड़ी विस्तृत चिकित्सा प्रणाली है हजारों वर्षों की खोजने के बाद हमारे पूर्वजनों ने ऐसे अनेक नुस्खे तैयार किए हैं जो घर में या हमारे आसपास के वातावरण में सहज ही उपलब्ध हो जाते हैं इन नुस्को की अधिकांश सामग्री को तो हम रोजमर्रा की जिंदगी में अपने खान-पान में भी शामिल किए हुए हैं यह नुस्खे सरलता से उपलब्ध होने वाले हैं तो है ही साथ ही रोगों रोगों की अचूक औषधि के रूप में भी प्रसिद्ध है ऐसे ही सरल उसको को हमारे बुजुर्गों ने आजमाया और फिर विरासत के रूप में अगली पीढ़ी को सौंप गए इस प्रकार के यह नुस्खे समोच्च भारतीय जनजीवन में बहुत प्रसिद्ध प्रसिद्ध होते हैं आज प्रयास सभी घरों के बुजुर्गों सदस्य किसी न किसी रोग के सरल और कारगर नुस्खा को जानते हैं और समय पढ़ने पर उनका प्रयोग करके रोग का इलाज भी करते हैं ऐसे ही सहजता से उपलब्ध सरलता से याद होने वाला और अचूक असर करने वालों नुस्खों के प्रयोग को घरेलू चिकित्सा के नाम से जाना जाता है

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