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sugar level test for pregnant women in hindi

 sugar level test for pregnant women in hindi 


गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए अहम होता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओ में कई शारीरिक व मानसिक और कई अन्य बदलाव भी होते हैं


साथ ही साथ कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा होती हैं। अगर गर्भवती महिलाएं इस दौरान तनाव लेती है अपना खान पीन का ध्यान नहीं रखती तो उन्हें जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा भी हो सकता है यह मुख्यतः तीन प्रकार की शुगर होती है टाइप 1, टाइप 2 व जेस्टेशनल डायबिटीज होती है  गर्भवती महिलाओं को कठिनाइयों से बचने के लिए उनको ब्लड शुगर (blood sugar level) का स्तर 95-140 mg/dL तक बनाए रखना चाहिए क्यों की एक स्वस्थ इंसान का सामान्य ब्लड शुगर (blood sugar level)का स्तर 90 से 100 mg/dL के बीच होना चाहिए। लेकिन कभी-कभी मानसिकता और खराब खान पीन का सेवन करने से ब्लड शुगर (blood sugar level) का स्तर कम और ज्यादा हो सकता है। ब्लड शुगर का कम या ज्यादा होना सेहत के लिए हानिकारक के साथ कई अन्य बीमारी हमारे शरीर में हो सकता है 


गर्भावस्था में शुगर के लक्षण क्या हो सकता है 

गर्भावस्था में शुगर पीड़ित महिलाओं में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं। ज्यादातर कुछ मामलों में इसकी जानकारी गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले कुछ नियमित जाँचों से पता चलता है। लेकिन कुछ साधारण लक्षण हो सकते हैं 

गर्भावस्था के दौरान आप बहुत जल्दी थक जाना 

आपकी नियमित खुराक से ज़्यादा भूख लगना

सामान्य मात्रा से ज़्यादा प्यास लगना

सामान्य से अधिक बार पेशाब आना

धुंधला दिखाई दे और किसी तरह का अन्य कोई स्किन इंफेक्शन हो तो सतर्क हो जाएं और डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। हालांकि ये कुछ सामान्य लक्षण हैं, लेकिन कभी-कभी शुगर के कारण भी होता है

कुछ अन्य प्रकार से लक्षण दिखाई देना 


गर्भावस्था में मधुमेह या जेस्टेशनल डायबीटीज तब होता है जब आपका शरीर गर्भावस्था के दौरान आवश्यक अतिरिक्त इंसुलिन नहीं बना पाता है। इंसुलिन, आपके अग्न्याशय में बना एक हार्मोन है जो की ग्लुकोज का उपयोग कर के शरीर को ऊर्जा प्रदान करता हैं और आपके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है गर्भावस्था के दौरान आपका शरीर कई विशेष हार्मोन बनाने के साथ अन्य परिवर्तनों से गुजरता है 

इन परिवर्तनों के कारण आपके शरीर की कोशिकाएं (सेल्स) इंसुलिन का अच्छी तरह से उपयोग नहीं कर पाती इस स्थिति के समय इंसुलिन रेजीसटेन्स कहा जाता है। गर्भावस्था के बाद के दिनों में अक्सर सभी गर्भवती महिलाओं में कुछ इंसुलिन रेजीसटेन्स होता है अधिकतर गर्भवती महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजीसटेन्स को दूर करने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन होता है लेकिन कुछ महिलाओं में इसकी मात्रा जरुरत के अनुसार नहीं बन पाती। उन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह या जेस्टेशनल डायबिटीज़ हो जाता है।

अधिक मोटापा भी गर्भावस्था में शुगर का एक बड़ा कारण होता है। अधिक मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में गर्भवती होने से पहले ही इंसुलिन रेजीसटेन्स हो सकता है जो बाद में जेस्टेशनल डायबिटीज का कारण हो सकता है। मधुमेह आप की फैमिली हिस्ट्री होने के कारण भी महिलाओं में जेनेटिक कारणों से भी इसकी संभावना  बनी रहती है।

👉 गर्भावस्था के दौरान शुगर परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है



गर्भावस्था के दौरान शुगर परीक्षण यह निर्धारित करने में मदद करता है कि आपको गर्भावस्था के दौरान मधुमेह है या नहीं। गर्भावस्था के दौरान रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करना माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


यदि आप अनदेखा छोड़ दिया तो गर्भकालीन के दौरान मधुमेह निम्नलिखित जटिलताओं का कारण बन सकता है 

जटिलताएँ जो आपके बच्चे को प्रभावित कर सकती हैं 

गर्भावस्था के दौरान उच्च शर्करा का स्तर समय से पहले प्रसव और प्रसव का कारण बन सकता है। या, यदि आपका बच्चा बड़ा है तो आपका डॉक्टर शीघ्र प्रसव की सलाह दे सकता है।

अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित रुप जाँच करवाएं जिससे यह सुनिश्चित हो की आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

सही समय पर सही मात्रा में स्वस्थ भोजन या हेल्दी डाइट लें। अपने डॉक्टर या डाइटीशीयन द्वारा बताए गए डाइट प्लान को जरुर फॉलो करें 


आप हमेशा ऐक्टिव रहें नियमित रुप से फिज़िकल ऐक्टिविटीज़ पर ज्यादा ध्यान दें जैसे चलना व व्यायाम करना आपके शुगर लेवल को कंट्रोल रखता है। यह साथ ही आपको इंसुलिन सेन्सिटिव भी बनाता है। आपके लिए कौन सी शारीरिक गतिविधि सही है और किस से आपको बचना है, इसके बारे में डॉक्टर से परामर्श लें।  


बच्चे की ग्रोथ की नियमित रूप मोनिटरिंग आपके डॉक्टर आपके बच्चे की वृद्धि और विकास की नियमित जाँच करेगा। 

यदि आप डाइट और फिज़िकल ऐक्टिविटी आपकी रक्त शर्करा को सही नहीं रख पाती तो डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करे 

आप को हमेशा याद रखना चाहिए कि गर्भावस्था के दौरान ज्यादा से ज्यादा अपना ख्याल स्वयं रखना चाहिए

और आप अपने परिवार से किसी भी तरह की आप को दिक्कत को जरुर शेयर करे ताकी जल्द से जल्द आप अपने डॉक्टर से मिल सकें 


Note,, आप कभी भी किसी के द्वारा बताए गए उपाय को कभी भी ना प्रयोग करे

आगर आप को हेल्दी रहना चाहिए आप को रोजाना आपने डॉक्टर से सलाह लें

यह जानकारी के केवल है खुद से इलाज कभी ना करे नही तो आप स्वयं जिम्मेदार होंगे 

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